Maithili Gajal : बिसरब हम केना अहाँकेँ, मनमें छी रख्ने

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मैथिली गजल

बिसरब हम केना अहाँकेँ, मनमें छी रख्ने
अहाँत’ मौलागेलौं, मुदा कफ़नमें छी रख्ने

ओतेक आँट कहाँ, जे मुहँ फोरिक’ बजाबी
अहाँक चलाचल्ती देखि, सपनमें छी रख्ने

सपनेमें टोकैछी, आ सपनेमें नियारैछीके
आनक नाता तोरिक’ गे अपनमें छी रख्ने

गरा अहाँकेँ लग्ब’लेल, सीनाकेँ नाप नै पूछू
छत्तिस इन्च के कहे, छप्पनमें छी रख्ने

छोड़ून’महलकेँ-रानी गरिब’ झोंपड़ी की सुतब
मनकेँ हम दाबि कहुना, तप्पनमें छी रख्ने

– विरेन्द्र कुमार सिंह (कुशवाहा)
हाल – दोहा क़तार

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