मैथिली Gajal : टुटलैए दिल सिसा जेका जिनगी भेलै बेकार

0
315

Maithili Gajal :

टुटलैए दिल सिसा जेका जिनगी भेलै बेकार ।
बिधाताके लिखल बिधना हम करैछी स्वीकार ।

हम पुरुष दोसरके लेल हरदम सोचैछी ,
अपना लेल कखनो नैं करैत छी कोनो विचार ।

माईबापके सपना आ वादमे कनियाँके ईच्छा,
पुरा करैईमे हम पुरुष बनैत छी अचार ।

बालबच्चाके भविष्यके लेल बनैछी परदेसी ,
समयसँ पैसा नैं भेजलाप’ सुनैछी फटकार ।

अपन सपनाके हमसब दैत छी बलि चढा ,
दोसरके सपनाके बनैत रहैत छी आधार ।

पुरुषक’ सपना कतेक बनैत रहतै लास ,
यदि जिवितो रहतै त’ बनल रहतै बेमार ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here